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राज्य शासन को गुमराह करने का आरोप, डीईओ से तीन दिन में मांगा जवाब – विभागीय जांच के संकेत

राज्य शासन को गुमराह करने का आरोप, डीईओ से तीन दिन में मांगा जवाब – विभागीय जांच के संकेत

बिलासपुर, 12 नवम्बर 2025।बिलासपुर जिले के स्कूल शिक्षा विभाग में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विजय टांडे पर राज्य शासन को विरोधाभासी जानकारी देने का आरोप लगा है। इस मामले में संयुक्त संचालक (जेडी) शिक्षा संभाग बिलासपुर ने कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करते हुए तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उत्तर असंतोषजनक पाया गया तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विरोधाभासी सूचना से उजागर हुई लापरवाही

संयुक्त संचालक द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि 10 नवंबर 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने कार्यालय से शासन को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें दावा किया गया कि जिले में निशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है और कोई भी विद्यार्थी पुस्तक से वंचित नहीं है।लेकिन इसी दिन शाम को संचालनालय स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) में डीईओ बिलासपुर ने अतिरिक्त पाठ्यपुस्तकों की मांग रख दी।दोनों बयानों के बीच स्पष्ट विरोधाभास पाए जाने पर संयुक्त संचालक ने इसे गंभीर प्रशासनिक त्रुटि और तथ्य छिपाने की कोशिश करार दिया है।

संभाग की छवि पर पड़ा असर !

नोटिस में उल्लेख है कि डीईओ द्वारा दी गई गलत और विरोधाभासी जानकारी से विभाग की साख को नुकसान पहुंचा है। जेडी ने कहा कि ऐसी गलत सूचनाएँ न केवल विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, बल्कि संभागीय स्तर पर शासन के समक्ष छवि को धूमिल करती हैं। उन्होंने चेताया कि उच्चाधिकारियों को गुमराह करने वाली इस तरह की घटनाएँ भविष्य में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

स्पष्टीकरण और संभावित कार्रवाई !

संयुक्त संचालक ने डीईओ विजय टांडे से पूछा है कि दोनों अवसरों पर दी गई सूचनाओं में विरोधाभास का क्या कारण था और किस आधार पर यह रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी गई। उन्हें तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।जेडी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जवाब असंतोषजनक पाया गया, तो विभागीय जांच या निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप!

इस नोटिस के बाद बिलासपुर जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों में चर्चा है कि यदि मामला गंभीरता से लिया गया, तो यह अन्य जिलों में भी समीक्षा और जवाबदेही की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।

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